चिट्ठाकार पर देबाशीष जी ने एक कड़ी देकर इस समाचार की ओर ध्यान आकर्षित कराया है. समाचार इस बात पर केंद्रित है कि हिंदी की स्थिति क्या है? संदर्भ हैं हिंदी फिल्मों के जाने-माने समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज द्वारा अपना ब्लॉग रोमन भाषा में लिखा जाना. मैं यहां ब्रह्मात्मज पर टिप्पणी नहीं कर रहा हूं बल्कि हिंदी के बारे में कुछ कहना चाहता हूं.
संजय का कार्य सब कुछ देखना और उन्हें सुनाना है जो नहीं देख पाए. संजय ने तब भी यही किया था, अब भी यही कर रहा है.
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