संजय का कार्य सब कुछ देखना और उन्हें सुनाना है जो नहीं देख पाए. संजय ने तब भी यही किया था, अब भी यही कर रहा है.
बहस लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बहस लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2008
कौन हैं वास्तव में दलित पत्रकार .....
अचानक संवेदनशीलता का ज्वार उमड़ पड़ा, मीडिया में दलितों की खोज हो रही है. इस बात पर बहस छेड़ने की कोशिश हो रही है कि मीडिया में दलित उपेक्षित क्यों हैं..... अचानक इसकी जरूरत क्यों आ पड़ी? किस छिपे हुए एजेंडे को लेकर यह षड्यंत्रपूर्ण बहस छेड़ी गई है? शायद बहस के लिए कोई और विषय नहीं बचा तो सोचा कि चलो यही पता करते हैं कि न्यूज़रूम में कितना जातिवाद है? गोया समाज में पहले से फैला जातिवाद कम है....
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
चिट्ठे का नया प्रकाशन स्थल
संजय उवाच को मैने अपने जालस्थल पर स्थानांतरित कर दिया है. नया पता यह है.... Sanjay Uvach http://www.sanjayuvach.com
-
इंटरनैट पर हिंदी को भले ही आज प्रथम दस भाषाओं में शुमार नहीं किया जा रहा हो लेकिन सच यह है कि इंटरनैट पर हिंदी के चिट्ठों की दुनिया का दिन द...
-
चिट्ठाकार पर देबाशीष जी ने एक कड़ी देकर इस समाचार की ओर ध्यान आकर्षित कराया है. समाचार इस बात पर केंद्रित है कि हिंदी की स्थिति क्या ह...
-
अचानक संवेदनशीलता का ज्वार उमड़ पड़ा, मीडिया में दलितों की खोज हो रही है. इस बात पर बहस छेड़ने की कोशिश हो रही है कि मीडिया में दलित उपेक्ष...